नाई को ठाकुर क्यों कहते हैं?

आज जिसे हम साधारण नाई मानते हैं, वही व्यक्ति कभी समाज में ऊँचा दर्जा रखता था। इतिहास के पन्नों में छिपी बात यह है कि उत्तर भारत में कई नाई समुदाय के लोग वास्तव में क्षत्रिय वंश के थे। इन्हें 'क्षत्रिय-न्यायी' कहा जाता था। कहा जाता है कि प्राचीन काल में महापदम नन्द, जो भारत के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट थे, के नेतृत्व में ये लोग सामने आए।

ये न्यायी लोग न सिर्फ मुंडन करते थे, बल्कि समाज में न्याय, चिकित्सा और धार्मिक कार्यों में भी सहायता करते थे। इतना ही नहीं, कई इलाकों में तो इन्हें ठाकुर कहकर सम्मान दिया जाता था, क्योंकि वे ज्ञान और दायित्व के धनी थे।

समय बदला और शिक्षा और सामाजिक स्थिति के अभाव में ये लोग धीरे-धीरे 'नाई' के रूप में चिन्हित हो गए। दक्षिण भारत में इन्हें 'ब्राह्मण-न्यायी' कहा जाता था, जबकि उत्तर में उनकी जड़ें क्षत्रियता से जुड़ी थीं।

आज भी कई परिवार अपनी उत्पत्ति को गौरव के साथ याद करते है

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