ठाकुर: भारतीय समाज में योद्धा और ज़मींदार वर्ग

ठाकुर भारतीय समाज की जाति-संरचना में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। पारंपरिक चार वर्ण व्यवस्था में ब्राह्मणों के ठीक बाद क्षत्रिय वर्ण आता है, और ठाकुर इसी वर्ग के अंतर्गत आते हैं। इन्हें योद्धा जाति के रूप में जाना जाता है। कई मानवविज्ञानी और इतिहासकार ठाकुर और राजपूत को लगभग एक ही मानते हैं। वास्तव में, उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में, ठाकुर समुदाय लंबे समय से प्रमुख ज़मींदार और सामाजिक-राजनीतिक ताकत रहा है।

इतिहास गवाह है कि आजादी के बाद से ही ठाकुर समुदाय ने उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों की राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला है। ज़मीन के साथ-साथ ताकत भी उनके हाथ में रही है। यही कारण है कि आज भी गाँव-गाँव में ठाकुर की बात की जाती है, चाहे सामाजिक मामले हों या राजनीतिक फैसले।

हालाँकि समय बदल रहा है और जाति-आधारित ताकत कमजोर पड़ रही है, फिर भी ठाकुर समुदाय अपन

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