ओबीसी के इतिहास का एक महत्वपूर्ण पल

डॉ. भीमराव अंबेडकर को केवल दलित समुदाय का नेता नहीं माना जाना चाहिए। वास्तव में, वे ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए भी एक प्रेरणास्रोत रहे हैं। कई लोग नहीं जानते कि ओबीसी के लिए आरक्षण की नींव भी अंबेडकर के विचारों और दबाव के कारण ही पड़ी।

1953 में, डॉ. काका कालेलकर आयोग की स्थापना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। यह आयोग उन सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े समुदायों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए बनाया गया था जो अनुसूचित जाति और जनजाति से अलग थे। लेकिन इस पीछे की कहानी में अंबेडकर की भूमिका सबसे अहम थी।

उन्होंने संविधान सभा में जोर देकर कहा था कि समाज के अन्य पिछड़े वर्गों को भी शिक्षा और रोजगार में न्याय मिलना चाहिए। इसी दबाव के परिणामस्वरूप कालेलकर आयोग का गठन हुआ। हालांकि, उस समय के राजनीतिक हालातों के कारण इस आयोग की सिफारिशें तुरंत लागू नहीं हो सकीं, लेकिन यह सोच आगे चलकर मंडल आयोग

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