मृत्यु के बाद कौन साथ जाता है?
"तस्माद्धर्म: सहायश्च सेवितव्य: सदा नृभि:" — यह वचन गहरे सच को छू लेता है। मृत्यु के बाद संबंध समाप्त हो जाते हैं, यह सच है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि प्रेम खत्म हो जाता है। मृत्यु के बाद शारीरिक संबंध टूट जाते हैं। जो लोग कभी घनिष्ठ थे, वे अंतिम संस्कार के बाद धीरे-धीरे अपने जीवन में वापस आ जाते हैं। आँसू सूख जाते हैं, दुःख थोड़ा हल्का होता है। लेकिन यहाँ धर्म की भूमिका अमर हो जाती है।
धर्म केवल पूजा-प्रार्थना नहीं है। यह वह आचरण है जो हमारे कर्मों में झलकता है। जीवन भर जो सच्चाई, दया, ईमानदारी और सेवा का मार्ग अपनाया जाता है, वही धर्म अंत तक साथ निभाता है। कोई धन नहीं ले जा सकता, न ही रिश्तेदार। लेकिन जो अच्छे कर्म हमने किए, वे हमारे साथ जाते हैं।
इसलिए कहा जाता है कि मृत्यु के बाद संबंध टूट जाते हैं, लेकिन धर्म नहीं टूटता। वही आत्मा के साथ जाता है। इसीलिए जीवन में धर्म की ओर ध्य
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