धारा 497: विवाहेतर संबंध और कानूनी स्थिति

धारा 497 भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की एक पुरानी धारा थी, जो विवाहेतर संबंधों को लेकर बनाई गई थी। इसे साल 1860 में ब्रिटिश शासन के दौरान लागू किया गया था। इसके तहत कोई पुरुष, अगर वह किसी दूसरे व्यक्ति की पत्नी के साथ उसके पति की अनुमति के बिना यौन संबंध बनाता है, तो उसे अपराध माना जाता था।

लेकिन यह कानून आज के समय के हिसाब से पुराना और अनुचित माना जाने लगा था। यह महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता के अधिकार के खिलाफ था। क्योंकि इस धारा में सिर्फ पुरुष पर ही कार्रवाई हो सकती थी, चाहे महिला सहमत हो या न हो। वहीं, कोई महिला अगर किसी दूसरे पुरुष के साथ संबंध बनाती, तो उस पर इस धारा के तहत कोई कार्रवाई नहीं हो सकती थी।

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 11 सितंबर, 2018 को इस धारा को घोषित कर दिया। न्यायाधीशों ने कहा कि यह कानून महिलाओं को वस्तु की तरह देखता है और उनकी गरिमा को कम करता है। अब विवाहेतर संबंध

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