मंगल: धरती का पुत्र

प्राचीन कथाओं के अनुसार, मंगल ग्रह को धरती का पुत्र माना जाता है। कहा जाता है कि जब शिवजी के पसीने की बूंदें धरती पर गिरीं, तो उनकी तपती गर्मी से अवंतिका, आज की उज्जैन, की धरती फट गई। उस दरार से एक तेजोमय शक्ति प्रकट हुई, जो मंगल ग्रह बनी।

उसी समय एक दैत्य का अंत शिवजी ने किया और उसके रक्त की बूंदें धरती पर बिखर गईं। नवजात मंगल ग्रह ने उस रक्त को अपने भीतर समा लिया, जिससे उसका शरीर लाल हुआ। इसी लाल रंग के कारण आज भी मंगल को लाल ग्रह कहा जाता है।

धरती से उत्पन्न होने के कारण, मंगल को ‘धरती पुत्र’ कहा गया। प्राचीन समय में ज्योतिष और धर्म के मिलन से इन कथाओं की रचना हुई, जो केवल खगोलीय घटनाओं को ही नहीं, बल्कि मानवीय भावनाओं और शक्तियों को भी दर्शाती हैं।

मंगल आज भी ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे पराक्रम, साहस और युद्ध का कारक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति मंगल के प्रभाव में जन्म लेता है, उसमें ऊर्जा, द

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