आईटी एक्ट की धारा 66A क्या है और इसका सच क्या है?

डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के इस दौर में साइबर कानूनों की जानकारी होना बहुत जरूरी है. भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66A के तहत किसी कंप्यूटर, मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए आपत्तिजनक, भ्रामक या आक्रामक सामग्री भेजना एक गंभीर अपराध माना गया था.

इस धारा के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को 3 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर गलत जानकारी और साइबर बुलिंग को रोकना था. हालांकि, इस कानून की भाषा काफी अस्पष्ट थी, जिसकी वजह से इसका गलत इस्तेमाल भी होने लगा था.

इसी वजह से साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ मामले में धारा 66A को पूरी तरह रद्द (असंवैधानिक घोषित) कर दिया. अदालत ने माना कि यह धारा संविधान द्वारा दी गई अभिव्यक्ति की आजादी का हनन करती है. हालांकि, कानून रद्द होने के बावजूद आज भी इंटरनेट पर दूसरों को परेशान करना या भ्रामक सामग्री फैलाना अन्य धाराओं के तहत अपराध की श्रेणी में आता है, इसलिए डिजिटल दुनिया में सतर्क रहना जरूरी है.

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