इस्लाम में छह कलीम: मुसलमानों की आस्था के स्तंभ

इस्लाम में पांच नहीं, बल्कि छह कलीम हैं, जो मुसलमानों के लिए आस्था और इबादत के मूल स्तंभ माने जाते हैं। ये छहों कलीम कुरान और हदीस पर आधारित हैं और मुसलमान अपने दैनिक जीवन में इनका अभ्यास करते हैं। हर कलीम एक विशेष आध्यात्मिक सत्य को दर्शाता है, जो व्यक्ति को अल्लाह के प्रति निष्ठा और भक्ति सिखाता है।

पहला कलीम, "अल्लाह की जय हो और अल्लाह की स्तुति हो", मुसलमानों के लिए अल्लाह की महिमा को स्वीकार करने का सबसे पवित्र वाक्य है। यह स्पष्ट करता है कि अल्लाह के सिवा कोई पूजनीय नहीं, और वही सबसे बड़ा है। यह वाक्य ईमान की नींव है, जिसे हर मुसलमान अपने जीवन में दोहराता है।

ये छहों कलीम सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका हैं। बचपन से ही मुस्लिम बच्चों को इन्हें याद कराया जाता है ताकि वे अल्लाह के साथ अपने रिश्ते को समझ सकें। मस्जिदों में भी इनका प्रसार और शिक्षा दी जाती है।

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