बहू और बेटी: दो नाम, एक ही स्नेह
कई बार घर में छोटी-मोटी बहस हो जाती है कि बहू और बेटी में क्या फर्क है? असल में, अगर दिल से देखें, तो फर्क बस नाम का होता है। एक तो वह होती है जो घर में पैदा होती है, और दूसरी वह जो शादी के बाद नए परिवार में कदम रखती है।
लेकिन सोचिए, जब कोई लड़की अपने मायके से विदा होकर ससुराल जाती है, तो क्या वह अपनी मान-मर्यादा भूल जाती है? बिल्कुल नहीं। वह तो उम्मीद करती है कि यहाँ भी उसका सम्मान होगा, प्यार मिलेगा। और अगर घर वाले खुले दिल से उसे अपनाएँ, तो वह बेटी जैसी ही लगती है।
दरअसल, बेटी और बहू में रिश्ते की शुरुआत अलग होती है, लेकिन भावनाएँ एक जैसी होती हैं। एक रिश्ता खून का है, तो दूसरा प्रेम और आत्मीयता का। लेकिन जहाँ प्यार हो, वहाँ नातों के नाम मायने नहीं रखते।
माँ-बाप अपनी बेटी को हमेशा अपना घर समझते हैं। फिर चाहे वह शादी के बाद दूर रहे। उसी तरह, एक अच्छी बहू भी पति के
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