मोटर वाहन अधिनियम, 1988: भारत में यातायात कानून की नींव

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 21 सितंबर, 1988 को संसद द्वारा पारित किया गया था। हालांकि, यह कानून 1 जुलाई, 1989 से लागू हुआ। इस कानून ने पुराने 1939 के मोटर वाहन अधिनियम को रद्द कर दिया, जो उस समय तक लागू था।

यह अधिनियम भारत में मोटर वाहनों, ड्राइवरों, परिवहन और सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों को विनियमित करने के लिए बनाया गया था। 1939 के कानून पर आधारित होने के बावजूद, 1988 का अधिनियम बदलती जरूरतों के अनुसार अधिक आधुनिक और व्यापक था।

समय के साथ, देश में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी और सड़क दुर्घटनाओं में भी इजाफा हुआ। इसे देखते हुए, मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 लाया गया, जिसने मूल कानून में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए। इसमें जुर्माने में भारी बढ़ोतरी, ड्रंक ड्राइविंग पर सख्त दंड, और वाहन चालकों के लिए जिम्मेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

यह कानून

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