विवाह के आठ प्रकार: प्राचीन शास्त्रों की दृष्टि

हिंदू शास्त्रों के अनुसार विवाह के आठ प्रकार माने गए हैं — ब्रह्म, दैव, आर्य, प्राजापत्य, असुर, गन्धर्व, राक्षस और पिशाच। ये प्रत्येक विवाह के प्रकार विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और नैतिक आधारों पर आधारित हैं।

इनमें से सबसे उच्च एवं श्रेष्ठ माना जाता है — ब्रह्म विवाह। इसमें ब्राह्मण पिता अपनी पुत्री को विद्या और संस्कार से सम्पन्न मानवता के उद्देश्य से ऐसे योग्य वर को देते हैं, जिसके बदले में कोई मोल-जोल या धन नहीं लिया जाता। नारद पुराण के अनुसार यह सबसे पवित्र विवाह है।

इसके बाद दैव और आर्य विवाह को भी उत्तम स्थान दिया गया है। दैव विवाह में वर को यज्ञ में खड़े ब्राह्मण को कन्या दी जाती है, जबकि आर्य विवाह में वर को आमंत्रित कर कन्यादान किया जाता है।

दूसरी ओर, असुर विवाह (जहाँ धन देकर वर खरीदा जाता है), गन्धर्व (प्रेम विवाह, जैसे नल-दमयंती), राक्षस (कन

यह भी देखें

विस्तृत लेख

भारतीय प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था में गोपनीयता की शपथ: आखिर कौन दिलाता है उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों को कर्तव्यनिष्ठा का वचन?

और पढ़ें →

बेरोजगारी के वैश्विक चक्रव्यूह में फंसे हुए राष्ट्र: क्या केवल आंकड़े ही बयां करते हैं देशों की असली माली हालत?

और पढ़ें →

अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए सम्मानजनक कमाई के बेहतरीन अवसर: अब डिग्री नहीं, हुनर का बोलबाला है

और पढ़ें →

भारत में बेरोजगारी की भयावह स्थिति: क्या यह केवल आंकड़ों का मायाजाल है या एक गहराता सामाजिक संकट?

और पढ़ें →

भारतीय सेना के जांबाज सिपाहियों की नींद का सच: क्या वाकई सरहद के रखवाले चैन से सो पाते हैं?

और पढ़ें →

संबंधित विषय