कुंडली का 8वां भाव: गुप्त शक्तियों और अप्रत्याशित परिवर्तन का स्थान
ज्योतिष में कुंडली के आठवें भाव को अष्टम भाव कहा जाता है, जो अत्यंत गहन और रहस्यमय माना जाता है। इसे सामान्यतः मृत्यु, रहस्य, आपदा और छल-कपट से जोड़ा जाता है, लेकिन यह केवल नकारात्मकता का संकेतक नहीं है। जब अष्टम भाव धन भाव (दूसरा भाव) या कर्म भाव (छठा भाव) के साथ संबंध स्थापित करता है, तो व्यक्ति अप्रत्याशित तरीकों से उन्नति कर सकता है।
इस योग का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि यह सफलता को किसी भी माध्यम से प्राप्त करने की प्रवृत्ति दिखाता है। कई बार ऐसे लोग सही मार्ग के बजाय गलत राह चुन लेते हैं — छल, छल-कपट या अनैतिक तरीकों के माध्यम से सफलता हासिल कर लेते हैं। ऐसे जातकों की जन्मपत्रिका में अष्टमेश (8वें भाव का स्वामी) का धन या कर्म भाव के साथ संबंध अक्सर देखा जाता है।
हालांकि, यह जरूरी नहीं कि यह योग हर किसी के लिए बुराई का संकेत दे। कई बार यह अचानक धन लाभ, विरासत
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