क्या जापान के पास अपनी सेना है?

यह सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास और वैश्विक राजनीति में जापान की एक अनोखी स्थिति है। सीधे शब्दों में कहें तो तकनीकी और संवैधानिक रूप से जापान के पास एक पारंपरिक हमलावर सेना (Army) नहीं है। द्वितीय विश्व युद्ध की भीषण तबाही और परमाणु हमलों का सामना करने के बाद, जापान ने भविष्य में कभी भी युद्ध न करने का फैसला किया।

जापान के संविधान के अनुच्छेद 9 (Article 9) के तहत, देश ने अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए युद्ध के अधिकार और सैन्य बल के इस्तेमाल का पूरी तरह से त्याग कर दिया है। दुनिया में लगभग 22 ऐसे देश हैं जिनके पास अपनी सेना नहीं है, और इनमें से कई देशों ने अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी उन बड़े देशों को दे रखी है जिन्होंने कभी उन पर शासन किया था।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि जापान पूरी तरह से असुरक्षित है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों और पड़ोसियों से मिलने वाली चुनौतियों को देखते हुए, जापान ने 1954 में 'जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्सेस' (JSDF) यानी आत्मरक्षा बल का गठन किया। यह बल केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है, न कि किसी दूसरे देश पर आक्रमण करने के लिए।

वर्तमान समय में, जापान का यह आत्मरक्षा बल अत्याधुनिक तकनीक, उन्नत लड़ाकू विमानों और नौसेना के जहाजों से लैस है। यह दुनिया की सबसे आधुनिक रक्षा प्रणालियों में से एक है। इसके अलावा, अमेरिका-जापान सुरक्षा संधि के तहत अमेरिका भी जापान की सुरक्षा के लिए वचनबद्ध है। संक्षेप में, जापान के पास हमला करने वाली सेना भले न हो, लेकिन अपनी रक्षा के लिए उनके पास एक बेहद मजबूत और कुशल सुरक्षा तंत्र मौजूद है।

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