स्वच्छता सर्वेक्षण और हमारे शहर

भारत में साफ-सफाई को लेकर हर साल एक बड़ा मुकाबला होता है, जिसे हम स्वच्छ सर्वेक्षण के नाम से जानते हैं। इसके जरिए देश के अलग-अलग शहरों की रैंकिंग तय की जाती है ताकि वहां के लोग और प्रशासन स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें।

अगर बात करें 2021 के आंकड़ों की, तो 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले बड़े शहरों में कोटा उत्तर नगर निगम क्षेत्र को इस सूची में सबसे निचلا स्थान मिला था। हालांकि, किसी शहर का पीछे रह जाना हमेशा के लिए उसकी पहचान नहीं बनता। यह एक ऐसा मौका होता है जब वहां के नागरिक और प्रशासन मिलकर अपनी कमियों को दूर कर सकते हैं और अपने इलाके को दोबारा हरा-भरा और साफ-सुथरा बना सकते हैं।

स्वच्छता केवल सरकार की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सबकी साझा आदत है। जब हर नागरिक अपने स्तर पर कचरा सही जगह फेंके और पॉलीथिन का इस्तेमाल कम करे, तभी कोई भी शहर असल मायने में स्वच्छ और सुंदर बन सकता है। बदलाव की शुरुआत हमेशा हमारी अपनी छोटी-छोटी आदतों से ही होती है।

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