राज्य वृक्ष: खेजड़ी – रेगिस्तान का कल्पवृक्ष

राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी है, जिसे प्रायः “रेगिस्तान का गौरव” या “थार का कल्पवृक्ष” कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम प्रोसोपिस सिनेरेरिया (Prosopis cineraria) है। यह पेड़ सूखी और अर्ध-शुष्क जलवायु में भी आसानी से उगता है, जिसके कारण यह राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में खासा महत्व रखता है।

खेजड़ी केवल पेड़ नहीं, बल्कि लाखों लोगों और पशुओं के अस्तित्व का आधार है। इसकी हरी पत्तियाँ पशुओं के चारे के रूप में उपयोग होती हैं और इसके फल 'लोण्डी' या 'खेजरा' इंसानों के भी लिए पोषण का स्रोत होते हैं। इसकी छाया में गाँव के लोग बैठकर बातचीत करते हैं, बरसात में भी निश्चिंत रहते हैं।

यह पेड़ पर्यावरण के लिए भी अत्यंत लाभदायक है। इसकी गहरी जड़ें मिट्टी को बहने से बचाती हैं और भूमिगत जल को संतुलित रखती हैं। 1983 में खेजड़ी को राज्य वृक्ष के रूप में घोषित किया गया, ताकि इसके संरक्षण के

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय