भारत: तीसरी दुनिया का देश क्यों?

आज भी जब कुछ लोग भारत को "तीसरी दुनिया" का देश कहते हैं, तो यह नाराज़गी या अपमान नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक श्रेणी से आता है। इस शब्द का इस्तेमाल पहले द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तटस्थ राष्ट्रों के लिए किया जाता था — जो न तो पश्चिमी दुनिया (अमेरिका और नाटो) के साथ थे, और न ही पूर्वी ब्लॉक (सोवियत संघ) के। भारत उस समय गैर-गुट आंदोलन का नेतृत्व कर रहा था, इसलिए वह इस श्रेणी में आ गया।

लेकिन क्या आज भी भारत तीसरी दुनिया का देश है?

नहीं, वास्तव में नहीं। आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यहाँ के शहरों में आईटी हब, स्टार्ट-अप संस्कृति, अंतरिक्ष तकनीक और वैश्विक नेतृत्व की बढ़ती भूमिका देखी जा सकती है। फिर भी, कई ग्रामीण इलाकों में गरीबी, शिक्षा की कमी और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियाँ बरकरार हैं। यही वजह है कि कुछ लोग अभी भी भारत को पिछड़ा मान लेत

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