पैसे छापने से महंगाई कैसे बढ़ती है?
जब सरकार या केंद्रीय बैंक ज्यादा पैसे छापता है, तो बाजार में पैसे की मात्रा तेजी से बढ़ जाती है। अगर इस बढ़ी हुई रकम के बावजूद देश में वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन उतना नहीं बढ़ता, तो समस्या शुरू हो जाती है।
समझिए, मान लीजिए आपके पास 100 रुपये हैं और बाजार में केवल 10 सेब उपलब्ध हैं। अब अगर आपके पास 200 रुपये होंगे और सेब फिर भी सिर्फ 10 ही हैं, तो आप सेब खरीदने के लिए ज्यादा पैसे देने तैयार हो जाएंगे। इसी तरह, जब पैसा बहुत ज्यादा होता है और सामान सीमित होता है, तो लोग कीमतों में बढ़ोतरी कर देते हैं।
यही कारण है कि पैसे छापने से सीधे महंगाई बढ़ती है। जब अर्थव्यवस्था में पैसे की आपूर्ति उत्पादन की तुलना में तेजी से बढ़ती है, तो मुद्रास्फीति (Inflation) की स्थिति पैदा हो जाती है। कई बार सरकार आर्थिक संकट के समय नए पैसे छापकर खर्च करती है, लेकिन इससे असली समस्या और गहराती है।
इसलिए
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