भारतीय हॉकी के जनक: ध्यानचंद
भारतीय खेल जगत में ध्यानचंद का नाम एक ऐसे महान खिलाड़ी के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने हॉकी के मैदान में ऐसा जादू बिखेरा कि उन्हें "हॉकी का जादूगर" कहा जाने लगा। उनके पिता श्यामलाल ब्रिटिश भारतीय सेना में भर्ती थे और सेना के लिए हॉकी खेलते थे। इसी पारिवारिक संस्कृति के बीच ध्यानचंद का बचपन बीता, जहाँ खेलने की आदत घर में ही डाली गई।
ध्यानचंद के दो भाई थे — मूल सिंह और रूप सिंह। रूप सिंह भी एक शानदार हॉकी खिलाड़ी थे और उन्होंने भी भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेला। परिवार में खेल का माहौल होने से ध्यानचंद को छोटी उम्र में ही हॉकी के प्रति लगाव हो गया। वह खुद भी सेना में जुड़े और धीरे-धीरे अपने अनोखे कौशल के बल पर दुनिया भर में प्रसिद्ध हुए।
1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक्स में उन्होंने अकेले 14 गोल कर भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। उनकी विरासत आज भी भारतीय खिलाड़ियों के लिए प्रेर
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