भारत में खेलों की शुरुआत कब हुई?
भारत में खेलों का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितना कि स्वयं भारतीय संस्कृति। वैदिक युग से ही खेल हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। माना जाता है कि रामायण और महाभारत के समय, यानी लगभग 1900 ईसा पूर्व से लेकर 7000 ईसा पूर्व तक, खेल केवल मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि वीरता, प्रशिक्षण और सम्मान का प्रतीक भी थे।
उस समय के पुरुषों, खासकर राजपूत और योद्धाओं से उम्मीद की जाती थी कि वे तीरंदाजी, घुड़सवारी, कुश्ती, भारोत्तोलन, तैराकी और शिकार जैसे कौशल में निपुण हों। रामायण में भगवान राम का तीरंदाजी के माध्यम से सीता का चुनाव, या अर्जुन की महाभारत में तीर का निशाना साधने की कला — ये सिर्फ कथाएं नहीं, बल्कि उस युग के खेल-संस्कृति के जीवंत उदाहरण हैं।
वैसे ही आज हम क्रिकेट या हॉकी की बात करते हैं, उस समय तीरंदाजी या कुश्ती में महारत हासिल करना एक गौरव की बात थी। इन खेलों का उद्देश्य केवल शारीरिक सामर्थ्य नहीं, बल
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