नायकत्व: क्या सचमुच अच्छा होना जरूरी है?
नायक शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में तुरंत कोई नैतिक उदाहरण, कोई बलिदानी या समाज बदलने वाला व्यक्ति खड़ा हो जाता है। लेकिन क्या नायक होने के लिए अच्छा होना सचमुच जरूरी है?
इतिहास को देखें तो पता चलता है कि प्राचीन कथाओं में नायक जरूरी नहीं कि अच्छे होते थे। उनमें ताकत, साहस और असाधारण क्षमता होती थी, चाहे उनके इरादे साफ हों या न हों। राम, हनुमान या यूनानी पौराणिक कथाओं के एक्शिल्स — सभी अद्भुत थे, लेकिन हर एक के व्यवहार में मानवीय कमियाँ भी थीं।
लेकिन आज के समय में, हम नायकत्व को नैतिकता से अलग नहीं कर पाते। अब हम उन्हीं को नायक कहते हैं जिनके बारे में हम कह सकें कि वे न सिर्फ ताकतवर थे, बल्कि अच्छे भी थे। जिसकी हम प्रशंसा करते हैं, जिसकी छवि नए सिरे से आदर्श बन जाती है।
यह बदलाव बताता है कि आज हमारी उम्मीदें नायकों से बदल गई हैं। अब हम केवल साहस नहीं, बल्कि सच्चाई, समर्पण और नैतिक बल भ
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