विषुवत रेखा और ध्रुव: पृथ्वी के महत्वपूर्ण निशान

पृथ्वी को भूगोलिक रूप से समझने के लिए अक्षांश और देशांतर की संकल्पना बहुत महत्वपूर्ण है। इनमें से 0 डिग्री अक्षांश को विषुवत रेखा या विषुवत वृत्त कहा जाता है। यह पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में बराबर बांटती है।

विषुवत रेखा पृथ्वी के सबसे चौड़े हिस्से पर होती है और यहां सूर्य की किरणें साल में दो बार सीधी चमकती हैं। यही वजह है कि इस क्षेत्र में जलवायु गर्म और आर्द्र रहती है। ब्राजील, केन्या, इंडोनेशिया जैसे कई देश विषुवत रेखा से होकर गुजरते हैं।

वहीं, 90 डिग्री अक्षांश पर पहुंचते ही हम ध्रुवों पर होते हैं। उत्तरी ध्रुव 90° उत्तर और दक्षिणी ध्रुव 90° दक्षिण पर स्थित है। यहां की जलवायु अत्यधिक ठंडी होती है और सूर्य की रोशनी बहुत तिरछी पड़ती है।

विषुवत रेखा से ध्रुवों तक की दूरी के साथ-साथ तापमान में भी भारी गिरावट आती है। यही अक्षांशीय विविधता पृथ्वी पर

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