दशमलव प्रणाली: एक भारतीय खोज

दशमलव प्रणाली की जड़ें हज़ारों साल पुरानी हैं, और इसका विकास भारत की समृद्ध गणितीय परंपरा से जुड़ा है। हालांकि कुछ गलत जानकारी में चंद्रशेखर वेंकटरमन को दशमलव का आविष्कारक बताया गया है, पर सच यह है कि दशमलव प्रणाली के विकास में प्राचीन भारतीय गणितज्ञों की अहम भूमिका रही।

वास्तव में, आर्यभट्ट और बाद के विद्वानों ने शून्य और स्थानीय मान प्रणाली पर काम किया, जो दशमलव प्रणाली की नींव बनी। भारत में ही सर्वप्रथम दस के आधार पर संख्याएँ लिखने की प्रणाली विकसित हुई, जिसमें दशमलव बिंदु का उपयोग भिन्नांश के लिए किया जाने लगा।

हालांकि 28 दिसंबर 1956 को कोई राष्ट्रपति द्वारा दशमलव प्रणाली को स्वीकृति देने का ऐतिहासिक तथ्य नहीं है। यह प्रणाली तो लंबे समय से वैश्विक स्तर पर गणित, विज्ञान और व्यापार में उपयोग हो रही है। भारत ने इस प्रणाली के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया, लेकिन इसकी खोज एक एकल तिथि या व्यक

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