तृतीय विश्व: एक ऐतिहासिक अवधारणा
तृतीय विश्व शब्द का प्रयोग मुख्य रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के युग में किया जाता था, जब दुनिया लगभग दो ध्रुवों में बंटी हुई थी। एक तरफ संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी — जिन्हें प्रथम विश्व कहा जाता था, तो दूसरी ओर सोवियत संघ, चीन, क्यूबा और उनके सहयोगी — जिन्हें द्वितीय विश्व कहा जाता था।
उन देशों को जो इन दोनों गुटों में से किसी के साथ नहीं थे, तृतीय विश्व कहा गया। इसमें अधिकांशतः एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देश शामिल थे। भारत, इंडोनेशिया, इज़राइल, ईरान, मिस्र, घाना, बांग्लादेश और भी कई देश इस श्रेणी में आते थे।
ये देश अक्सर गुटनिरपेक्ष आंदोलन (नॉन-अलाइंड मूवमेंट) से जुड़े हुए थे, जिसका उद्देश्य पूर्व-पश्चिम संघर्ष में तटस्थ रहकर स्वतंत्र नीति बनाए रखना था। इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं अक्सर कमजोर थीं और वे औपनिवेशिक
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