सार्थक और निरर्थक शब्दों में अंतर
सार्थक और निरर्थक शब्द — ये दोनों शब्द हिंदी भाषा में शब्दों के प्रकार को समझने में मदद करते हैं। जब हम कहते हैं कि कोई शब्द सार्थक है, तो इसका अर्थ होता है कि उस शब्द का एक स्पष्ट और समझदार अर्थ है। जैसे – ‘पेड़’, ‘गाड़ी’, ‘खुशी’। इन शब्दों को सुनते ही हमारे दिमाग में कोई न कोई छवि या भाव आता है।
दूसरी ओर, निरर्थक शब्द वे होते हैं जिनका कोई स्पष्ट अर्थ नहीं होता। ये शब्द खाली या बेमानी लग सकते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ बच्चे पहले बोलना सीखते समय अक्सर ‘ललल’, ‘डुमडुम’ या ‘ताता’ जैसे शब्द बोलते हैं, जिनका कोई अर्थ नहीं होता। कभी-कभी कविता या साहित्य में भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल भाव जगाने के लिए किया जाता है, लेकिन फिर भी वे वास्तविक अर्थ में निरर्थक ही माने जाते हैं।
सार्थक शब्द भाषा की नींव हैं। बिना इनके हम कोई वाक्य नहीं बना सकते। वहीं, निरर्थक शब्द अक्सर भाषा के विकास या भावनात
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