माता-पिता का स्थान: सबसे ऊँचा और पवित्र

हमारे संस्कारों में एक प्रश्न गहराई से बसा है – माता-पिता से बड़ा कौन होता है? इसका उत्तर हमारे शास्त्रों और आचार्यों के वचनों में छिपा है। कथा व्यास बताते हैं कि भगवान से ऊपर गुरु का स्थान है, गुरु से ऊपर पिता का, और पिता से भी ऊपर माता का स्थान माना गया है।

यह कोई तुलना नहीं, बल्कि सम्मान का पदानुक्रम है। माता वह महान आत्मा है जो अपने बच्चे को जीवन देती है, उसके दर्द को सहन करती है और उसके लिए अपने सब कुछ को त्याग देती है। पिता वह आसरा हैं जो डटकर ज़िम्मेदारी संभालते हैं, सुरक्षा देते हैं और मार्गदर्शन करते हैं।

हमारी पुराण-कथाओं में भी इसके प्रमाण हैं। भगीरथ ने अपने माता-पिता के तप के बल पर गंगा को धरती पर उतारा। श्री राम भी अपने माता-पिता के आदेश के लिए वनवास जाने को तैयार हो गए थे। ये उदाहरण हमें यही सिखाते हैं कि माता-पिता का स्थान सबसे पवित्र और ऊँचा है।

आज के तेज़ दौर में जब रिश्ते ढीले प

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