धारा 156(3) झूठी साबित हो तो क्या होता है?
अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि अगर धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत दर्ज मामला बाद में झूठा साबित हो जाए, तो क्या होता है? दरअसल, यह धारा पुलिस को स्वतंत्र जांच शुरू करने का अधिकार देती है। लेकिन अगर यह साबित हो कि आरोप बनावटी थे, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
कानून के अनुसार, जब तक कोई व्यक्ति दोषी साबित नहीं होता, तब तक उसे निर्दोष माना जाता है। लेकिन अगर कोई झूठी शिकायत दर्ज कराता है और उसके पीछे बुरी मंशा होती है, तो उस शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों में न्यायालय गंभीरता दिखाता है, क्योंकि यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाता है।
11 अगस्त, 2021 को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा गया था कि जब धारा 156(3) के तहत आदेश पारित होता है, तो यह कभी-कभी प्रशासनिक और न्यायिक तंत्र में विफलता को दर्शाता है। कई बार बिना सोचे-समझे यह धारा लागू की जाती है, जिससे निर्दोष लोगो
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