कैंसर के आखिरी दिनों में क्या होता है?

कैंसर के अंतिम दौर में शरीर पर गहरा असर देखने को मिलता है। इस दौरान मरीज को निगलने में तकलीफ हो सकती है – चाहे वह तरल हो या ठोस भोजन। खाने की इच्छा कम हो जाती है, जिसकी वजह से भूख नहीं लगती और वजन तेजी से कम होने लगता है।

शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और मरीज को थकान व कमजोरी का अहसास रहता है। यह सब शरीर के स्वाभाविक ढलते कार्यों का हिस्सा होता है। फिर भी, अगर मरीज खाना चाहे, तो उसे छोटी-छोटी मात्रा में वह भोजन दिया जा सकता है, जो उसे पसंद हो। मसलन, प्यार से बनाया गया एक छोटा सा पकौड़ा या पसंदीदा मिठाई भी उसके मन को शांत कर सकती है।

इस दौरान डॉक्टर और परिवार का ध्यान मुख्य रूप से मरीज के आराम और सुकून पर होता है। भोजन से ज्यादा, उसकी भावनाओं की देखभाल करना ज्यादा मायने रखता है।

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