पिता का सच्चा अर्थ
बच्चे के जीवन में पिता की उपस्थिति सिर्फ एक नाममात्र की भूमिका नहीं, बल्कि एक अहम ज़िम्मेदारी है। पैदाइश के पहले पल से ही एक बाप का कर्तव्य शुरू हो जाता है। वह सिर्फ तब नहीं, जब बच्चा मुस्कुराता है, बल्कि तब भी उसके साथ होना चाहिए जब वह रोता है।
एक बाप का फर्ज न सिर्फ बच्चे की खाने-पहनने की ज़रूरतों को पूरा करना है, बल्कि उसकी भावनाओं को समझना भी है। जब बच्चा डरता है, जब वह कुछ समझ नहीं पाता, तब बाप का हाथ उसे सहारा देना चाहिए। उसे जीवन के सही और गलत मार्ग में फर्क समझाना, यही पितृत्व की सच्चाई है।
आज के समय में, कई बाप सिर्फ घर का खर्च उठाने तक सीमित रह जाते हैं। लेकिन असली भूमिका तो बच्चे के दिल तक पहुँचने की है। बातें सुनना, उसके सपनों को समझना, गलतियों पर डाँटना भी प्यार से, यही बच्चे को सही दिशा देता है।
एक बाप बस एक पिता नहीं, बल्कि बच्चे का पहला गुरु और सहारा होता है। उसकी मुस्कान तभी सच्ची होती ह
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