बालक का सपना: सैनिक बनने की अभिलाषा

एक छोटा सा बालक, जिसकी आँखों में देश के लिए कुछ बड़ा करने की चमक है, अपने हाथ में बंदूक लेना चाहता है। यह कोई सामान्य इच्छा नहीं, बल्कि एक गहरे समर्पण की पहली सान है। वह न केवल बंदूक पकड़ना चाहता है, बल्कि देश की सेवा करने के लिए सैनिक बल में भर्ती होना चाहता है।

इस उम्र में ऐसा सपना क्यों?

आज के समय में, कई बच्चे खेल-खिलौनों के बीच खोए रहते हैं, लेकिन इस बालक के मन में कुछ अलग ही छवि है। वह न केवल फिल्मों में दिखाए गए नायकों की तरह दिखना चाहता है, बल्कि वास्तविक जीवन में देश के लिए खड़ा होना चाहता है। उसकी इच्छा सिर्फ एक बंदूक पकड़ने की नहीं है — बल्कि एक जिम्मेदारी निभाने की है।

ऐसे बच्चे के भावी भविष्य को देखकर लगता है कि देश की रक्षा में उसका योगदान होगा। उसकी छोटी उम्र में यह सोच उम्मीद जगाती है। शिक्षा और अनुशासन के साथ, वह एक दिन सचमुच अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर सकता है।

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