माता से बड़ा कौन है?

माता से बड़ा कौन है? यह सवाल सुनने में छोटा लगे, लेकिन इसके पीछे छिपा अर्थ गहरा है। कई बार हम तुलना करने लगते हैं — माता और पिता में कौन बड़ा है? लेकिन सच तो यह है कि माता-पिता से बड़ा कोई नहीं होता

वे ही तो वह पहली शक्ति हैं जिनके कारण हम इस धरती पर जीवन का अहसास कर पाते हैं। माँ की गोद में वह पहली नींद, वह पहली मुस्कान, वह पहला प्यार... और पिता की कर्मठता, उनकी चुपचाप की लगन, उनका संघर्ष — ये सब मिलकर हमारे जीवन की नींव बनाते हैं।

क्या कोई सोच सकता है कि माँ से ऊपर कौन है? वही तो वह पहली देवी हैं जिन्होंने नौ महीने तक हमें अपने शरीर में समेटे रखा। उनके आँसू, उनकी प्रार्थनाएँ, उनकी थकी हुई आँखों में छिपा प्यार — ये सब किसी भी तुलना से परे हैं। और फिर पिता की वह चुपचाप की ताकत, जो घर के बाहर लड़ती है, लेकिन अंदर से बच्चों की खुशी के लिए तरसती है।

इसलिए, इस सवाल का जवाब ढूँढ़ने की जगह, आइए उनके प्रति कृतज

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