मन की शुद्धि का सरल साधन
मन को शुद्ध करने का सबसे प्राचीन और प्रभावी माध्यम संध्या है। जब मन विकारों से मुक्त हो जाता है, तब ओऽम् के साथ वैदिक श्लोकों का जाप करते हुए संध्या साधना का विधान है। यह केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति का मार्ग है।
महाभारत और योगभाष्य में वेदव्यास ने संध्या के महत्व पर प्रकाश डाला है। वे कहते हैं कि संध्या केवल ईश्वर के साक्षात्कार का साधन नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा को स्वच्छ व स्थिर बनाने का भी माध्यम है। नियमित संध्या से मनुष्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति की ओर बढ़ता है।
सुबह, दोपहर और सायंकाल की संध्या में न केवल शरीर और मन की शुद्धि होती है, बल्कि आत्मविश्वास, स्थिरता और आंतरिक शांति भी मिलती है। यह साधना भक्ति भी है, साधना भी और जीवन की दिशा देने वाली शक्ति भी।
आज के व्यस्त जीवन में संध्या को नजरअंदाज करना आत्मिक उपेक्षा है। थोड़े समय के लिए मन को शांत कर ओऽम् के स
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