राजपूतों का बाप कौन?
जब बात राजपूतों की होती है, तो सवाल उठता है—राजपूतों का बाप कौन? जवाब सीधा है: जन्म से नहीं, कर्म से बनते हैं राजपूत। कई नामों वाले राजपूत कहलाते हैं—राणा, डडवाल, शेखावत, सिसोदिया, कटोच—मगर असली पहचान खून से नहीं, बल्कि व्यवहार से होती है।
जो मन से राजपूत है, उसके काम ही उसकी शान बताते हैं। वो झूठ से दूर, सच के साथ खड़ा होता है। धर्म की रक्षा, निर्बल की रक्षा, सम्मान की रक्षा—यही उसकी पहचान होती है। राजपूत वही है जो अपने वचन को पूरा करे, जो अपनी जमीन और जनता के लिए खड़ा हो सके।
इतिहास में हमने ऐसे राजपूत देखे हैं, जिन्होंने आखिरी सांस तक अपने सिद्धांतों से नहीं हार मानी। चाहे राणा प्रताप हों, महाराणा सांगा हों या भारतपुज्य महारानी रानी पदमिनी—उनकी महिमा खून से नहीं, उनके साहस, बलिदान और नैतिकता से है।
तो राजपूतों का बाप कौन? वो नहीं जिसने सिर्फ राजपूत नाम धारण किया, बल्कि वही है जिसने र
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