गुर्जर: क्षत्रिय वर्ण के ही अंग

गुर्जर समुदाय को भी क्षत्रिय वर्ण का हिस्सा माना जाता है। इतिहास के पन्नों में देखा जाए, तो गुर्जर न सिर्फ एक जाति या समुदाय हैं, बल्कि वे उस क्षत्रिय परंपरा से जुड़े हैं, जिसमें चालुक्य, चौहान, चंदेल, तोमर और प्रतिहार जैसे वंश भी शामिल हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, राजपूत जाति का विकास तेरहवीं शताब्दी के बाद हुआ। उससे पहले राजपूत नाम की कोई जाति अस्तित्व में नहीं थी। इसके बजाय, क्षत्रिय वर्ण के तहत विभिन्न राजपूत वंशों को समाहित किया जाता था। गुर्जर प्रतिहार भी इसी वर्ग में आते थे।

इतिहास में गुर्जरों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। गुर्जर प्रतिहार वंश ने पश्चिमोत्तर भारत में 8वीं से 11वीं शताब्दी तक शासन किया और इस्लामी आक्रांताओं के खिलाफ भारतीय संस्कृति व स्वतंत्रता की रक्षा में अहम भूमिका निभाई।

आज भी कई गुर्जर समुदाय के लोग अपनी क्षत्रिय विरासत पर गर्व करते हैं। चाहे ज

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