बीरबल ने खुद को धोखा दिया
अकबर और बीरबल की दोस्ती के किस्से आज भी लोगों के बीच छोटे से लेकर बूढ़े तक सुनाए जाते हैं। एक दिन ऐसा हुआ कि बादशाह अकबर बीरबल की एक टिप्पणी से इतना नाराज हुए कि उन्होंने उन्हें दरबार छोड़ने का हुक्म दे दिया। न सिर्फ दरबार, बल्कि उन्होंने बीरबल को आगरा शहर छोड़कर जाने का आदेश दे दिया।
बीरबल को यह फैसला बहुत दुखी कर गया। वे मन टूटे, सिर झुकाए आगरा शहर से बाहर चले गए। लेकिन कुछ दिन बाद अकबर को एहसास हुआ कि उनका फैसला गलत था। दरबार में बीरबल की गैरमौजूदगी में बातें अजीब लगने लगीं। वह मजाक, वह बुद्धिमत्ता, वह हल्कापन — सब गायब था।
अकबर ने बीरबल को वापस बुलाने का फैसला किया। लेकिन जब उन्होंने बीरबल को ढूंढ़ा, तो पता चला कि वे तो शहर के पास ही एक छोटे से घर में रह रहे हैं। बीरबल ने कहा, "मैंने नहीं छोड़ा, आपने छोड़ा। मैं तो वहीं हूँ, जहाँ मेरी जगह है।"
अकबर मान गए। दोनों की दोस
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।