अकबर: एक महान सम्राट
अकबर को 'महान' कहे जाने के पीछे कई कारण हैं, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि वह एक सच्चे अर्थ में सबका बादशाह था। वह सिर्फ मुस्लिम नहीं, बल्कि हर धर्म और समुदाय के लोगों के दिलों में बसता था।
धार्मिक सहिष्णुता उसके शासन की आत्मा थी। उसने कभी किसी को उसके धर्म के आधार पर नीचा नहीं समझा। उल्टा, उसने हिंदू और मुस्लिम संप्रदायों के बीच एकता की भावना बढ़ाने के लिए दीन-ए-इलाही नामक एक विचारधारा शुरू की, जो सभी धर्मों के सार को लेकर बनी थी।
अकबर का दरबार सचमुच सबके लिए खुला था। वहाँ धर्म, जात या सम्प्रदाय का कोई भेद नहीं था। हैरानी की बात यह है कि उसके दरबार में हिंदू सरदारों की संख्या मुस्लिम सरदारों से अधिक थी
यही वजह है कि इतिहास उसे न सिर्फ एक बलशाली शासक, बल्कि एक सम्मानित और दूरदर्शी नेता के रूप में याद करता है। अकबर ने साबित किया कि ताकत सिर्फ तलवार में नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने में भी होती है।
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