महाराणा प्रताप की कठिनाइयों के दिन
महाराणा प्रताप के जीवन के कुछ ऐसे दिन भी थे, जब वे जंगलों में छिपकर रहते थे और भोजन के लिए संघर्ष करना पड़ता था। उनके सामने इतनी भयानक भूख की स्थिति आई कि उन्हें घास से बनी रोटियाँ खानी पड़ीं। कहते हैं कि एक बार तो उनकी बेटी के लिए बनाई गई घास की रोटी एक बिल्ली ने चुरा ली थी। यह केवल एक घटना नहीं है, बल्कि उनके संघर्षमय जीवन की एक झलक है।
इसी तरह के कठिन समय में भी महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी। वे अपने देश और गौरव के लिए लड़ते रहे। उनकी वफादारी केवल अपने लोगों तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि उनके घोड़े चेतक ने भी ऐतिहासिक प्रसिद्धि प्राप्त की। चेतक ने हल्दी घाट के युद्ध में अपने स्वामी को संकट से बचाने के बाद अंतिम साँस ली। एक घोड़ा जिसने इतिहास में अपना नाम अमर कर लिया।
महाराणा प्रताप केवल एक राजा नहीं थे, बल्कि एक प्रतीक थे – लोहे की तरह मजबूत इच्छाशक्ति के। वे भूखे रहे, लेकिन अपने सिद्धांतो
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