तलवार नहीं, उसकी धार मायने रखती है

कभी सोचा है कि तलवार खरीदते वक्त किस बात पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए? जवाब सीधा है – तलवार की चमक और उसकी धार का पैनापन। कोई भी तलवार इतनी सुंदर म्यान में क्यों न बंद हो, अगर उसकी धार निकम्मी है, तो वह बेकार है। तलवार की असली कीमत उसके काम में है, न कि उसके रंग-ढंग में।

ठीक वैसे ही, जब किसी साधु या सन्त से ज्ञान प्राप्त करने की बात आती है, तब भी यही बात लागू होती है। उनकी जाति, पहनावा या बाहरी रूप के पीछे भागने के बजाय, उनके शिक्षाओं के गहराई पर ध्यान देना चाहिए। ज्ञान की धार तीखी होनी चाहिए, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से आए।

इतिहास में कई ऐसे संत हुए हैं जो सामाजिक मानदंडों से परे थे, लेकिन उनके वचनों ने लाखों के जीवन बदल दिए। तो फिर हम क्यों उनके पीछे छिपे ज्ञान को उनकी उत्पत्ति से जोड़ते हैं? जैसे तलवार की असली कसौटी उसकी कार्यक्षमता है, वैसे ही साधु की असली पहचान उसके अंदरूनी ज्ञ

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