मुकदमा कैसे खारिज होता है?

अदालत में कोई मुकदमा तभी चल सकता है जब सभी कानूनी औपचारिकताएँ पूरी हों। अगर कोई वादी अपना मुकदमा दायर करते समय निर्धारित कोर्ट-फीस नहीं भरता, तो उसका वादपत्र खारिज हो सकता है। सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 के नियम 11(सी) के तहत अदालत ऐसे वादपत्र को अस्वीकार कर सकती है।

इसके अलावा, कोर्ट-फीस एक्ट की धारा 8-बी(3) के तहत भी मुकदमे को खारिज किया जा सकता है, अगर आवश्यक फीस नहीं भरी गई हो। फीस न भरने की स्थिति में अदालत द्वारा पारित आदेश वास्तव में मुकदमे को खारिज करने का आदेश होता है।

साधारण शब्दों में, अगर कोई वादी अपने वाद में आवश्यक फीस भरना भूल जाए, तो उसका मुकदमा स्वतः अवैध हो सकता है। इसलिए, अदालत में मुकदमा दायर करते समय न्यायालय शुल्क के नियमों का पूरा ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है।

14 अगस्त, 2021 को एक ऐसे ही मामले में अदालत ने फैसला सुनाया, जहाँ वादपत्र फीस न भरने के कारण खारिज हो गया

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