गज ए सिकंदरी: माप की एक पुरानी प्रणाली
भारत के इतिहास में माप-तौल की कई प्रणालियाँ रही हैं, जिनमें 'गज ए सिकंदरी' एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सिकंदर लोदी, जो लोदी वंश के प्रसिद्ध शासक थे, ने 15वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के दौरान भूमि नापने के लिए एक मानक पैमाना लागू किया था। इसी को 'गज ए सिकंदरी' कहा जाता था।
यह पैमाना 30 इंच के बराबर होता था, जो आधुनिक माप के हिसाब से लगभग 76 सेंटीमीटर के बराबर है। प्राचीन भारतीय प्रणाली के अनुसार, इसे 39 अंगुल के बराबर भी माना जाता था। अंगुल तब का एक सामान्य माप था, जो औंगुल के आधार पर बनाया गया था।
गज ए सिकंदरी का उपयोग मुख्यतः जमीन की नाप, भवन निर्माण और कर वसूली के लिए किया जाता था। इसके चलन से जमीन की खेती, खालसा भूमि के रिकॉर्ड और राजस्व प्रणाली में स्पष्टता आई।
सिकंदर लोदी के समय यह पैमाना पूरे उत्तर भारत में लागू हुआ और बाद के शासकों, विशेषकर मुगल काल में भी इसका प्रभाव द
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