गैर-जमानती अपराध में जमान combust कौन दे सकता है?
भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (क्रिमिनल प्रोसीजर कोड) के तहत अपराधों को जमानती और गैर-जमानती अपराधों में बांटा गया है। यदि कोई व्यक्ति गैर-जमानती अपराध में गिरफ्तार होता है, तो पुलिस उसे जमानत पर नहीं छोड़ सकती। इस तरह के मामलों में जमानत केवल न्यायिक मजिस्ट्रेट या स्थाई न्यायाधीश ही दे सकते हैं।
यह अहम बात है कि गैर-जमानती अपराधों में जमानत स्वचालित नहीं मिलती। अभियुक्त को अदालत के सामने उपस्थित होकर अपनी जमानत के लिए आवेदन करना पड़ता है। अदालत तब जमानत देने के लिए तमाम पहलुओं पर विचार करती है, जैसे — मामले की गंभीरता, सबूतों की मजबूती, आरोपी की पृष्ठभूमि और फरार होने का खतरा।
इसके विपरीत, जमानती अपराधों में पुलिस जांच अधिकारी को जमानत देने का अधिकार होता है, बशर्ते आरोपी उचित जमानत राशि जमा करे और अन्य शर्तें पूरी करे। लेकिन गैर-जमानती मामलों में यह सुविधा नहीं होती।
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