क्या आप जानते हैं? ₹1 का सिक्का बनाने में सरकार को होते हैं भारी नुकसान

क्या आपने कभी सोचा है कि जो सिक्के आपकी जेब में खनकते हैं, उन्हें बनाने में सरकार का कितना खर्च आता है? भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा एक RTI के जवाब में दी गई जानकारी बेहद चौंकाने वाली है। सिक्कों के निर्माण, यानी उनकी मिंटिंग (Minting) की लागत उनके असली मूल्य से भी अधिक हो सकती है।

आरबीआई के मुताबिक, ₹1 का सिक्का छापने (बनाने) में औसतन ₹1.11 का खर्च आता है। इसका मतलब है कि एक रुपये का सिक्का बाजार में लाने के लिए सरकार को अपने पास से 11 पैसे ज्यादा लगाने पड़ते हैं। वहीं, अगर ₹2 के सिक्के की बात करें, तो इसे बनाने की लागत ₹1.28 आती है। हालांकि ₹2 के सिक्के पर सरकार को थोड़ा फायदा होता है, लेकिन ₹1 का सिक्का पूरी तरह से घाटे का सौदा साबित होता है।

अब सवाल यह उठता है कि सरकार ऐसा नुकसान क्यों उठाती है? दरअसल, सिक्के बहुत टिकाऊ होते हैं। कागजी नोटों की तुलना में सिक्के सालों-साल चलते हैं और जल्दी खराब नहीं होते। बाजार में छोटे लेन-देन को आसान बनाए रखने के लिए इन सिक्कों का सर्कुलेशन बेहद जरूरी है। इसके अलावा, ₹5 और ₹10 के बड़े सिक्कों को बनाने में उनके मूल्य से कम खर्च आता है, जिससे सरकार इस पूरे घाटे को संतुलित (Balance) कर लेती है।

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