राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति

भारत के राष्ट्रपति को संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत विशेष परिस्थितियों में अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है। यह शक्ति तब प्रयोग की जाती है जब संसद का सत्र चल रहा नहीं होता और किसी महत्वपूर्ण कानून को तत्काल लागू करने की आवश्यकता होती है।

अध्यादेश का दर्जा संसद द्वारा पारित कानून के बराबर होता है। इसका मतलब है कि यह तुरंत लागू हो जाता है और देश में कानूनी असर डालता है। हालाँकि, यह शक्ति सीमित समय के लिए होती है। जैसे ही संसद का अगला सत्र शुरू होता है, उस अध्यादेश को पारित करने या खारिज करने का अधिकार संसद के पास होता है। यदि संसद उसे स्वीकृत नहीं करती, तो अध्यादेश अपने आप समाप्त हो जाता है।

यह प्रावधान लोकतंत्र में तत्कालीन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए है, लेकिन इसका उपयोग सावधानी से किया जाना चाहिए। इतिहास में कई बार अध्यादेशों के उपयोग पर चर्चा हुई है, खासकर जब इसे लंबे समय तक बिना सं

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय