महाराणा प्रताप का 'घास की रोटी' का सच
महाराणा प्रताप के नाम आज भी दृढ़ता, स्वाभिमान और त्याग की मिसाल दी जाती है। उनके जीवन से जुड़ी एक छोटी सी घटना, जब उन्हें घास से रोटी बनाकर खानी पड़ी, आज भी लोगों के दिलों में जीवित है।
जब मुगलों से लड़ते हुए महाराणा को अपने घर-द्वार छोड़कर पहाड़ों में छिपना पड़ा, तब खाने-पीने की हालत इतनी खराब हो गई कि कभी-कभी खाने को घास के अलावा कुछ नहीं मिलता था। एक दिन, जब उनके साथियों के पास अनाज तक नहीं था, तो उन्होंने घास तोड़ी, उसे पीसकर आटे की तरह इस्तेमाल किया और एक रोटी बनाई। यह रोटी शायद पचने में भारी थी, लेकिन उसके पीछे का संदेश स्पष्ट था — आजादी के लिए कोई भी त्याग कम नहीं।
इस दौरान महाराणा और उनके साथ जंगली सब्जियां, जड़ें और कंद-मूल भी खाया करते थे। ये साधारण चीजें उनके जीवन को संभाले रखती थीं। लेकिन उनका हौसला कभी नहीं टूटा।
महाराणा प्रताप की यह कहानी सिर्फ एक भूख मिटाने की
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