पंजाबी लोग दिवाली क्यों मनाते हैं?
दिवाली सिर्फ देश-दुनिया भर में मनाया जाने वाला उत्सव ही नहीं, बल्कि पंजाब के लिए यह एक गहरा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व भी रखता है। पंजाबी समुदाय, खासकर सिख समुदाय, इस दिन को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाते हैं।
साल 1619 की बात है, जब छठे सिख गुरु, गुरु हरगोविंद साहिब जी, को ग्वालियर के किले में कैद रखा गया था। लेकिन गुरु जी ने शर्त रखी कि वे केवल तभी रिहा होंगे जब उनके साथ 52 राजपूत राजा भी मुक्त हों। ये राजा लंबे समय से न्याय के अभाव में कैद थे। जब गुरु हरगोविंद साहिब जी ने उन सभी को साथ लेकर किले से बाहर कदम रखा, तो यह केवल एक मुक्ति नहीं, बल्कि न्याय और इंसानियत की जीत थी।
उसी दिन को यादगार बनाने के लिए सिख समुदाय ने दीपमाला जलाई। तब से लेकर आज तक पंजाबी सिख समाज दिवाली के दिन गुरु हरगोविंद साहिब जी के इस बलिदान और नैतिक जीत को याद करते हैं। यह दिवाली सिर्फ खुशियों का नहीं,
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