दीपावली और बौद्ध: एक अनकहित व्यथा
दीपावली को लेकर आज भी कई सवाल उठते हैं, खासकर बौद्ध समुदाय के बीच।
ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से, यह दिन सिर्फ उजियाले और खुशी का नहीं, बल्कि दुख और यादों का भी दिन है। एक प्राचीन मान्यता के अनुसार, इसी दिन वामन ने, जिन्हें ब्राह्मण परंपरा में विष्णु का अवतार माना जाता है, आदिवासी राजा महाबली (बाली) की हत्या की थी। हालांकि यह कथा लोककथा के रूप में प्रचलित है, लेकिन कुछ बौद्ध समुदाय इसे एक अन्याय के प्रतीक के रूप में देखते हैं।
इसके अलावा, नवबौद्ध अम्बेडकरवादी समुदाय दीपावली का जश्न नहीं मनाते। इसके पीछे एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है — पुष्यमित्र शुंग के शासनकाल में हजारों बौद्ध भिक्षुओं की हत्या की गई थी। यह घटना बौद्ध समुदाय के लिए एक गहरे दुख का कारण बनी है।
पहले इस दिन को एकादशी के रूप में मनाया जाता था, लेकिन समय के साथ यह दीपावली में बदल गया।
इसलिए, जहां कई लोग दीपावल
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।