भारतीय सिनेमा की शुरुआत: एक सफर 1913 से
भारतीय सिनेमा की शुरुआत की कहानी बस एक फिल्म के साथ शुरू हुई — राजा हरिश्चंद्र. 1913 में रिलीज़ हुई यह फिल्म भारत की पहली मूक फिल्म थी। इसके पीछे काम करने वाले थे एक सपने देखने वाले — दादासाहेब फाल्के.
उन्हें भारतीय सिनेमा का जनक माना जाता है। फाल्के ने फिल्म बनाने के लिए अपनी जमा पूंजी लगा दी, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि कहानी कहने का यह एक नया ज़रिया है। राजा हरिश्चंद्र की कहानी एक सच्चे और न्यायप्रिय राजा की थी, जो अपने वचन के लिए सब कुछ कुर्बान कर देते हैं। यह कहानी भारतीय मूल्यों से भी जुड़ी थी।
1913 से 1918 के बीच, फाल्के ने कुल 23 फिल्में बनाईं। उनके काम ने भारत में फिल्म निर्माण की नींव रखी। धीरे-धीरे, यह कला बढ़ी, फिर मूक फिल्मों से टॉकीज़ तक पहुंच गई।
आज, जब हम बॉलीवुड, साउथ सिनेमा या क्षेत्रीय फिल्मों की बात करते हैं, तो हम उसी छोटी शुरुआत के साथ जुड़े होते ह
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