आत्मा और परमात्मा का मिलन
आत्मा और परमात्मा का मिलन कोई भौतिक घटना नहीं, बल्कि एक आंतरिक अनुभूति है। यह वही अवस्था है जब व्यक्ति का छोटा-सा 'मैं' सम्पूर्ण सत्य में विलीन हो जाता है। गीता के कृष्णार्जुन संवाद में यही सत्य छिपा है — जहाँ अर्जुन केवल एक योद्धा नहीं रह जाता, बल्कि एक जागृत आत्मा बन जाता है, जो परमात्मा के सामने अपने अहंकार को छोड़ देता है।
यह मिलन कोई दूर की बात नहीं। यह तो हमारे भीतर ही घटित होने वाला एक चमत्कार है। जब मन का विक्षेप शांत हो जाता है, जब लालसा, डर और भ्रम दूर होते हैं, तब हृदय के भीतर एक गहरी शांति उमड़ती है — वहीं परमात्मा का स्पंदन है।
हमें जिस सत्य को खोजना है, वह कहीं बाहर नहीं, बल्कि भीतर है। वही सत्य जिससे सृष्टि की उत्पत्ति होती है, जिसमें सभी जीव जीते हैं और जिसमें अंततः सब कुछ लय हो जाता है। यह जागृति ही आत्मा और परमात्मा का मिलन है — एक ऐसी अवस्था जहाँ अलगाव का भाव खत
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