नसीब कौन लिखता है?

नसीब या भाग्य के बारे में सोचते वक्त हर कोई यह जानना चाहता है — आखिर यह किसके हाथ में लिखा होता है? पुराणों के अनुसार, हमारे पिछले जन्मों के कर्म और उसमें छिपी इच्छाएं हमारे आज के नसीब को आकार देती हैं। ऐसा माना जाता है कि ईश्वर, इन कर्मों के आधार पर ही एक नए जीवन के लिए हमारा नसीब तय करके उसे हमारे साथ भेज देते हैं।

इसीलिए तो कहते हैं — नसीब का लिखा नहीं टलता। जो होना है, वह होकर रहता है। लेकिन यह भी सच है कि कर्म करने वाला मनुष्य स्वयं भी अपने भाग्य का निर्माण करता है। जीवन में कड़ी मेहनत, सच्चाई और अच्छे विचारों वाले लोग कई बार ऐसे परिस्थितियों को बदल देते हैं, जो पहले नामुमकिन लगते हैं।

हालाँकि नसीब पहले से लिखा जा सकता है, पर कर्म की शक्ति इतनी बड़ी है कि वह नसीब को भी झुका सकती है। कई बार देखा गया है कि लोग अपनी लगन, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प से असंभव को संभव कर दिखाते हैं।

तो हाँ, नसीब श

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