मौत के आखिरी घंटे में क्या होता है?
मौत के कुछ घंटे पहले, शरीर धीरे-धीरे बंद होना शुरू हो जाता है। दिल की धड़कन धीमी पड़ने लगती है, सांस लेने में तकलीफ होती है और खून का संचार कमजोर पड़ जाता है। इस वजह से शरीर का तापमान गिरने लगता है, खासकर हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं।
कई बार मरीज बेहोश हो जाते हैं या बहुत थका रहते हैं। कुछ लोग अचानक बोल उठते हैं, रोने लगते हैं या ऐसे व्यवहार करते हैं जैसे वे किसी और दुनिया को देख रहे हों। डॉक्टर इसे 'अंतिम जागरण' या भ्रम की स्थिति भी कहते हैं।
आंखें धुंधली हो सकती हैं, बातचीत कम हो जाती है और प्रतिक्रिया धीमी पड़ जाती है। कई बार मरीज लगभग सब कुछ सुन तो रहे होते हैं, लेकिन जवाब नहीं दे पाते। इसलिए परिवार वालों को सलाह दी जाती है कि वे आखिरी पल तक बात करते रहें — माफी मांगें, प्यार जताएं या सुकून भरी बातें करें।
ये सब बहुत दर्दनाक हो सकता है, लेकिन यह स्वाभाविक प्रक्रिया है। प्रेम और सम्म
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