भारत में साक्षरता: एक यात्रा
1947 में जब भारत आजाद हुआ, तब देश की साक्षरता दर महज 18% थी। यानी दस में से लगभग एक ही व्यक्ति पढ़-लिख सकता था। एक ऐसा देश, जो संस्कृति और ज्ञान की धरोहर रहा है, उसके लिए यह संख्या चिंता का विषय थी।
लेकिन 2011 की जनगणना ने एक सकारात्मक मोड़ दिखाया। भारत की साक्षरता दर अब 74.04% हो चुकी है। यह एक बड़ी उपलब्धि है, खासकर ग्रामीण इलाकों और महिलाओं की साक्षरता में आई प्रगति को देखते हुए। फिर भी, चुनौती कम नहीं हुई। विश्व की औसत साक्षरता दर 84% के करीब है, यानी भारत अभी भी पीछे है।
इस अंतर के पीछे कई कारण हैं — गरीबी, शिक्षा की सुविधाओं तक पहुँच में दूरी, और कई बच्चों का स्कूल छोड़कर काम पर जाना। फिर भी, सरकार और सामाजिक संस्थाएं लगातार प्रयास कर रही हैं। सरकारी योजनाएं जैसे सर्व शिक्षा अभियान और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ ने बच्चों, खासकर लड़कियों को स्कूल तक पहुँचाने में मदद की है।
आगे का रास्ता
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